घाव

कुछ पुराने ज़ख्म छोड़ जाते हैं निशान, जैसे समंदर रोज ही किनारे पर खड़ी चट्टानों पर वार करती है, कभी कोई कोना ढ़ह जाता है कभी कोई हिस्सा जर्जर खुद को किसी पेड़ के तने से बांध कर खुद को हर दिन एक जंग लड़ा करता है मग़र तुम आज कितने समय के बाद आए…… Continue reading घाव